प्रकाशितवाक्य 5:3 - सत्यवेदः। Sanskrit NT in Devanagari3 किन्तु स्वर्गमर्त्त्यपातालेषु तत् पत्रं विवरीतुं निरीक्षितुञ्च कस्यापि सामर्थ्यं नाभवत्। अध्यायं द्रष्टव्यम्अधिकानि संस्करणानिসত্যৱেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Assamese Script3 কিন্তু স্ৱৰ্গমৰ্ত্ত্যপাতালেষু তৎ পত্ৰং ৱিৱৰীতুং নিৰীক্ষিতুঞ্চ কস্যাপি সামৰ্থ্যং নাভৱৎ| अध्यायं द्रष्टव्यम्সত্যবেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Bengali Script3 কিন্তু স্ৱর্গমর্ত্ত্যপাতালেষু তৎ পত্রং ৱিৱরীতুং নিরীক্ষিতুঞ্চ কস্যাপি সামর্থ্যং নাভৱৎ| अध्यायं द्रष्टव्यम्သတျဝေဒး၊ Sanskrit Bible (NT) in Burmese Script3 ကိန္တု သွရ္ဂမရ္တ္တျပါတာလေၐု တတ် ပတြံ ဝိဝရီတုံ နိရီက္ၐိတုဉ္စ ကသျာပိ သာမရ္ထျံ နာဘဝတ်၊ अध्यायं द्रष्टव्यम्satyavEdaH| Sanskrit Bible (NT) in Cologne Script3 kintu svargamarttyapAtAlESu tat patraM vivarItuM nirIkSitunjca kasyApi sAmarthyaM nAbhavat| अध्यायं द्रष्टव्यम्સત્યવેદઃ। Sanskrit Bible (NT) in Gujarati Script3 કિન્તુ સ્વર્ગમર્ત્ત્યપાતાલેષુ તત્ પત્રં વિવરીતું નિરીક્ષિતુઞ્ચ કસ્યાપિ સામર્થ્યં નાભવત્| अध्यायं द्रष्टव्यम्satyavedaH| Sanskrit Bible (NT) in Harvard-Kyoto Script3 kintu svargamarttyapAtAleSu tat patraM vivarItuM nirIkSituJca kasyApi sAmarthyaM nAbhavat| अध्यायं द्रष्टव्यम् |