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प्रकाशितवाक्य 19:1 - सत्यवेदः। Sanskrit NT in Devanagari

1 ततः परं स्वर्गस्थानां महाजनताया महाशब्दो ऽयं मया श्रूतः, ब्रूत परेश्वरं धन्यम् अस्मदीयो य ईश्वरः। तस्याभवत् परित्राणां प्रभावश्च पराक्रमः।

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि


अधिकानि संस्करणानि

সত্যৱেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Assamese Script

1 ততঃ পৰং স্ৱৰ্গস্থানাং মহাজনতাযা মহাশব্দো ঽযং মযা শ্ৰূতঃ, ব্ৰূত পৰেশ্ৱৰং ধন্যম্ অস্মদীযো য ঈশ্ৱৰঃ| তস্যাভৱৎ পৰিত্ৰাণাং প্ৰভাৱশ্চ পৰাক্ৰমঃ|

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

সত্যবেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Bengali Script

1 ততঃ পরং স্ৱর্গস্থানাং মহাজনতাযা মহাশব্দো ঽযং মযা শ্রূতঃ, ব্রূত পরেশ্ৱরং ধন্যম্ অস্মদীযো য ঈশ্ৱরঃ| তস্যাভৱৎ পরিত্রাণাং প্রভাৱশ্চ পরাক্রমঃ|

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

သတျဝေဒး၊ Sanskrit Bible (NT) in Burmese Script

1 တတး ပရံ သွရ္ဂသ္ထာနာံ မဟာဇနတာယာ မဟာၑဗ္ဒော 'ယံ မယာ ၑြူတး, ဗြူတ ပရေၑွရံ ဓနျမ် အသ္မဒီယော ယ ဤၑွရး၊ တသျာဘဝတ် ပရိတြာဏာံ ပြဘာဝၑ္စ ပရာကြမး၊

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

satyavEdaH| Sanskrit Bible (NT) in Cologne Script

1 tataH paraM svargasthAnAM mahAjanatAyA mahAzabdO 'yaM mayA zrUtaH, brUta parEzvaraM dhanyam asmadIyO ya IzvaraH| tasyAbhavat paritrANAM prabhAvazca parAkramaH|

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

સત્યવેદઃ। Sanskrit Bible (NT) in Gujarati Script

1 તતઃ પરં સ્વર્ગસ્થાનાં મહાજનતાયા મહાશબ્દો ઽયં મયા શ્રૂતઃ, બ્રૂત પરેશ્વરં ધન્યમ્ અસ્મદીયો ય ઈશ્વરઃ| તસ્યાભવત્ પરિત્રાણાં પ્રભાવશ્ચ પરાક્રમઃ|

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

satyavedaH| Sanskrit Bible (NT) in Harvard-Kyoto Script

1 tataH paraM svargasthAnAM mahAjanatAyA mahAzabdo 'yaM mayA zrUtaH, brUta parezvaraM dhanyam asmadIyo ya IzvaraH| tasyAbhavat paritrANAM prabhAvazca parAkramaH|

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि




प्रकाशितवाक्य 19:1
23 अन्तरसन्दर्भाः  

अस्मान् परीक्षां मानय, किन्तु पापात्मनो रक्ष; राजत्वं गौरवं पराक्रमः एते सर्व्वे सर्व्वदा तव; तथास्तु।


अनन्तरं सप्तदूतेन तूर्य्यां वादितायां स्वर्ग उच्चैः स्वरैर्वागियं कीर्त्तिता, राजत्वं जगतो यद्यद् राज्यं तदधुनाभवत्। अस्मत्प्रभोस्तदीयाभिषिक्तस्य तारकस्य च। तेन चानन्तकालीयं राजत्वं प्रकरिष्यते॥


ततः परं स्वर्गे उच्चै र्भाषमाणो रवो ऽयं मयाश्रावि, त्राणं शक्तिश्च राजत्वमधुनैवेश्वरस्य नः। तथा तेनाभिषिक्तस्य त्रातुः पराक्रमो ऽभवत्ं॥ यतो निपातितो ऽस्माकं भ्रातृणां सो ऽभियोजकः। येनेश्वरस्य नः साक्षात् ते ऽदूष्यन्त दिवानिशं॥


ततः परं महाजनतायाः शब्द इव बहुतोयानाञ्च शब्द इव गृरुतरस्तनितानाञ्च शब्द इव शब्दो ऽयं मया श्रुतः, ब्रूत परेश्वरं धन्यं राजत्वं प्राप्तवान् यतः। स परमेश्वरो ऽस्माकं यः सर्व्वशक्तिमान् प्रभुः।


अस्मान् अनुसरणं कुर्वन्तु : १.

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