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गलातियों 4:27 - सत्यवेदः। Sanskrit NT in Devanagari

27 यादृशं लिखितम् आस्ते, "वन्ध्ये सन्तानहीने त्वं स्वरं जयजयं कुरु। अप्रसूते त्वयोल्लासो जयाशब्दश्च गीयतां। यत एव सनाथाया योषितः सन्तते र्गणात्। अनाथा या भवेन्नारी तदपत्यानि भूरिशः॥"

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि


अधिकानि संस्करणानि

সত্যৱেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Assamese Script

27 যাদৃশং লিখিতম্ আস্তে, "ৱন্ধ্যে সন্তানহীনে ৎৱং স্ৱৰং জযজযং কুৰু| অপ্ৰসূতে ৎৱযোল্লাসো জযাশব্দশ্চ গীযতাং| যত এৱ সনাথাযা যোষিতঃ সন্ততে ৰ্গণাৎ| অনাথা যা ভৱেন্নাৰী তদপত্যানি ভূৰিশঃ|| "

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

সত্যবেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Bengali Script

27 যাদৃশং লিখিতম্ আস্তে, "ৱন্ধ্যে সন্তানহীনে ৎৱং স্ৱরং জযজযং কুরু| অপ্রসূতে ৎৱযোল্লাসো জযাশব্দশ্চ গীযতাং| যত এৱ সনাথাযা যোষিতঃ সন্ততে র্গণাৎ| অনাথা যা ভৱেন্নারী তদপত্যানি ভূরিশঃ|| "

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

သတျဝေဒး၊ Sanskrit Bible (NT) in Burmese Script

27 ယာဒၖၑံ လိခိတမ် အာသ္တေ, "ဝန္ဓျေ သန္တာနဟီနေ တွံ သွရံ ဇယဇယံ ကုရု၊ အပြသူတေ တွယောလ္လာသော ဇယာၑဗ္ဒၑ္စ ဂီယတာံ၊ ယတ ဧဝ သနာထာယာ ယောၐိတး သန္တတေ ရ္ဂဏာတ်၊ အနာထာ ယာ ဘဝေန္နာရီ တဒပတျာနိ ဘူရိၑး။ "

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

satyavEdaH| Sanskrit Bible (NT) in Cologne Script

27 yAdRzaM likhitam AstE, "vandhyE santAnahInE tvaM svaraM jayajayaM kuru| aprasUtE tvayOllAsO jayAzabdazca gIyatAM| yata Eva sanAthAyA yOSitaH santatE rgaNAt| anAthA yA bhavEnnArI tadapatyAni bhUrizaH||"

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

સત્યવેદઃ। Sanskrit Bible (NT) in Gujarati Script

27 યાદૃશં લિખિતમ્ આસ્તે, "વન્ધ્યે સન્તાનહીને ત્વં સ્વરં જયજયં કુરુ| અપ્રસૂતે ત્વયોલ્લાસો જયાશબ્દશ્ચ ગીયતાં| યત એવ સનાથાયા યોષિતઃ સન્તતે ર્ગણાત્| અનાથા યા ભવેન્નારી તદપત્યાનિ ભૂરિશઃ|| "

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि

satyavedaH| Sanskrit Bible (NT) in Harvard-Kyoto Script

27 yAdRzaM likhitam Aste, "vandhye santAnahIne tvaM svaraM jayajayaM kuru| aprasUte tvayollAso jayAzabdazca gIyatAM| yata eva sanAthAyA yoSitaH santate rgaNAt| anAthA yA bhavennArI tadapatyAni bhUrizaH||"

अध्यायं द्रष्टव्यम् प्रतिलिपि




गलातियों 4:27
9 अन्तरसन्दर्भाः  

हे मम बालकाः, युष्मदन्त र्यावत् ख्रीष्टो मूर्तिमान् न भवति तावद् युष्मत्कारणात् पुनः प्रसववेदनेव मम वेदना जायते।


अपरं या नारी सत्यविधवा नाथहीना चास्ति सा ईश्वरस्याश्रये तिष्ठन्ती दिवानिशं निवेदनप्रार्थनाभ्यां कालं यापयति।


अस्मान् अनुसरणं कुर्वन्तु : १.

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