मत्ती 26:44 - satyavEdaH| Sanskrit Bible (NT) in Cologne Script44 pazcAt sa tAn vihAya vrajitvA tRtIyavAraM pUrvvavat kathayan prArthitavAn| अध्यायं द्रष्टव्यम्अधिकानि संस्करणानिसत्यवेदः। Sanskrit NT in Devanagari44 पश्चात् स तान् विहाय व्रजित्वा तृतीयवारं पूर्व्ववत् कथयन् प्रार्थितवान्। अध्यायं द्रष्टव्यम्সত্যৱেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Assamese Script44 পশ্চাৎ স তান্ ৱিহায ৱ্ৰজিৎৱা তৃতীযৱাৰং পূৰ্ৱ্ৱৱৎ কথযন্ প্ৰাৰ্থিতৱান্| अध्यायं द्रष्टव्यम्সত্যবেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Bengali Script44 পশ্চাৎ স তান্ ৱিহায ৱ্রজিৎৱা তৃতীযৱারং পূর্ৱ্ৱৱৎ কথযন্ প্রার্থিতৱান্| अध्यायं द्रष्टव्यम्သတျဝေဒး၊ Sanskrit Bible (NT) in Burmese Script44 ပၑ္စာတ် သ တာန် ဝိဟာယ ဝြဇိတွာ တၖတီယဝါရံ ပူရွွဝတ် ကထယန် ပြာရ္ထိတဝါန်၊ अध्यायं द्रष्टव्यम्સત્યવેદઃ। Sanskrit Bible (NT) in Gujarati Script44 પશ્ચાત્ સ તાન્ વિહાય વ્રજિત્વા તૃતીયવારં પૂર્વ્વવત્ કથયન્ પ્રાર્થિતવાન્| अध्यायं द्रष्टव्यम्satyavedaH| Sanskrit Bible (NT) in Harvard-Kyoto Script44 pazcAt sa tAn vihAya vrajitvA tRtIyavAraM pUrvvavat kathayan prArthitavAn| अध्यायं द्रष्टव्यम् |