मत्ती 21:30 - သတျဝေဒး၊ Sanskrit Bible (NT) in Burmese Script30 အနန္တရံ သောနျသုတသျ သမီပံ ဂတွာ တထဲဝ ကထ္တိဝါန်; တတး သ ပြတျုဝါစ, မဟေစ္ဆ ယာမိ, ကိန္တု န ဂတး၊ अध्यायं द्रष्टव्यम्अधिकानि संस्करणानिसत्यवेदः। Sanskrit NT in Devanagari30 अनन्तरं सोन्यसुतस्य समीपं गत्वा तथैव कथ्तिवान्; ततः स प्रत्युवाच, महेच्छ यामि, किन्तु न गतः। अध्यायं द्रष्टव्यम्সত্যৱেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Assamese Script30 অনন্তৰং সোন্যসুতস্য সমীপং গৎৱা তথৈৱ কথ্তিৱান্; ততঃ স প্ৰত্যুৱাচ, মহেচ্ছ যামি, কিন্তু ন গতঃ| अध्यायं द्रष्टव्यम्সত্যবেদঃ। Sanskrit Bible (NT) in Bengali Script30 অনন্তরং সোন্যসুতস্য সমীপং গৎৱা তথৈৱ কথ্তিৱান্; ততঃ স প্রত্যুৱাচ, মহেচ্ছ যামি, কিন্তু ন গতঃ| अध्यायं द्रष्टव्यम्satyavEdaH| Sanskrit Bible (NT) in Cologne Script30 anantaraM sOnyasutasya samIpaM gatvA tathaiva kathtivAn; tataH sa pratyuvAca, mahEccha yAmi, kintu na gataH| अध्यायं द्रष्टव्यम्સત્યવેદઃ। Sanskrit Bible (NT) in Gujarati Script30 અનન્તરં સોન્યસુતસ્ય સમીપં ગત્વા તથૈવ કથ્તિવાન્; તતઃ સ પ્રત્યુવાચ, મહેચ્છ યામિ, કિન્તુ ન ગતઃ| अध्यायं द्रष्टव्यम्satyavedaH| Sanskrit Bible (NT) in Harvard-Kyoto Script30 anantaraM sonyasutasya samIpaM gatvA tathaiva kathtivAn; tataH sa pratyuvAca, maheccha yAmi, kintu na gataH| अध्यायं द्रष्टव्यम् |