9 जै कोए इन्सान इसी जिन्दगी न्ही बितान्दा, तो वो उस इन्सान की तरियां सै, जो सही तै न्ही देख पान्दा, अर वो आन्धा से। वो भूल जावै सै के परमेसवर नै उसके पाप माफ कर दिये, जो उसनै मसीह पै बिश्वास करण तै पैहले करे सै।