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रोमियों 7:5 - उर्दू हमअस्र तरजुमा

5 जब हम अपनी इन्सानी फ़ितरत के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारते थे तो शरीअत हम में गुनाह की रग़बत पैदा करती थी जिस से हमारे आज़ा मुतास्सिर होकर मौत का फल पैदा करते थे।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

5 क्यूँकि जब हम जिस्मानी थे गुनाह की ख़्वाहिशों जो शरी'अत के ज़रिए पैदा होती थीं मौत का फल पैदा करने के लिए हमारे आ'ज़ा में तासीर करती थी।

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किताब-ए मुक़द्दस

5 क्योंकि जब हम अपनी पुरानी फ़ितरत के तहत ज़िंदगी गुज़ारते थे तो शरीअत हमारी गुनाहआलूदा रग़बतों को उकसाती थी। फिर यही रग़बतें हमारे आज़ा पर असरअंदाज़ होती थीं और नतीजे में हम ऐसा फल लाते थे जिसका अंजाम मौत है।

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रोमियों 7:5

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