रोमियों 7:2 - उर्दू हमअस्र तरजुमा2 मसलन शादीशुदा औरत, शरीअत के मुताबिक़ ख़ाविंद के ज़िन्दा रहने तक उस की पाबन्द होती है लेकिन अगर उस का ख़ाविंद मर जाये तो वह उस की पाबन्दी से आज़ाद हो जाती है। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 चुनाँचे जिस औरत का शौहर मौजूद है वो शरी'अत के मुवाफ़िक़ अपने शौहर की ज़िन्दगी तक उसके बन्द में है; लेकिन अगर शौहर मर गया तो वो शौहर की शरी'अत से छूट गई। See the chapterकिताब-ए मुक़द्दस2 शादी की मिसाल लें। जब किसी औरत की शादी होती है तो शरीअत उसका शौहर के साथ बंधन उस वक़्त तक क़ायम रखती है जब तक शौहर ज़िंदा है। अगर शौहर मर जाए तो फिर वह इस बंधन से आज़ाद हो गई। See the chapter |