रोमियों 3:5 - उर्दू हमअस्र तरजुमा5 मैं बतौर इन्सान ये बात कहता हूं के अगर हमारी नारास्ती ख़ुदा की रास्तबाज़ी की सिफ़त को ज़्यादा सफ़ाई से ज़ाहिर करती है तो क्या हम ये कहीं के ख़ुदा बेइन्साफ़ है जो हम पर ग़ज़ब नाज़िल करता है? मैं इन्सानी दलील इस्तिमाल कर रहा हूं। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20195 अगर हमारी नारास्ती ख़ुदा की रास्तबाज़ी की ख़ूबी को ज़ाहिर करती है, तो हम क्या करें? क्या ये कि ख़ुदा बेवफ़ा है जो ग़ज़ब नाज़िल करता है मैं ये बात इंसान की तरह करता हूँ। See the chapterकिताब-ए मुक़द्दस5 कोई कह सकता है, “हमारी नारास्ती का एक अच्छा मक़सद होता है, क्योंकि इससे लोगों पर अल्लाह की रास्ती ज़ाहिर होती है। तो क्या अल्लाह बेइनसाफ़ नहीं होगा अगर वह अपना ग़ज़ब हम पर नाज़िल करे?” (मैं इनसानी ख़याल पेश कर रहा हूँ)। See the chapter |