5 “धन्य औसौ सैजै जू नम्र औसौ, जिथुखै सै धोरती कै औधिकारी हौंदै।”
5 भागोईत असो! सेजे जू निसत्त असो, किन्देखे के संईसारी धर्ती तिनही की हंदी।