4 “धन्य औसौ सैजै जू शोक कौरौ, पौरमेशवर तिनुकै शान्तै दैन्दा।”
4 भागोईत असो! सेजे जू दु:ख-शोक करह्, किन्देखे के तिनही शाँण्त्ति भेट्दी।