28 ए गोएठ ला सुईन के, जेतना झेमन धरम सभा कर घर में रहीन, ओमन ढेरेच गुसाए गईन।
28 ये गोएठ मन ला सुनत जेतेक झन अराधनालय मे रहिन, सबेच झन क्रोध ले भईर गिन,