प्रकाशितवाक्य 3:3 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान3 होशा दी एछ, कि ताह केऊ साबै आसा शिक्षा भेटी दी और शूणीं ती, तिन्नां दी रह बणीं और आपणैं मना बदल़, ज़ै तूह बिऊंतअ नांईं रहे, ता मुंह एछणअ च़ोरा ज़िहै और ताखा निं कधि थोघ लागणअ कि मुंह कसा घल़ी पल़णअ ताह दी चुटी। See the chapterकुल्वी3 ऐबै ध्यान केर कि तैं कौस रीतियै शिक्षा प्राप्त केरी होर शुणी ती, तेसा शिक्षा रै मुताबक च़ल होर आपणै मना बै बुरै कोमा न बदल। अगर तू बिऊदा नी रौहला ता मूँ च़ोरा सांही ऐणा होर तौ कैधी भी नी ज़ाणना कि मूँ कौस घड़ी सज़ा देणै री तैंईंयैं तौ पैंधै ऐणा। See the chapterईनर सराजी मे नया नियम3 तेबा यह याद डाहे की ताए केहडी शिक्षा पाई होर शूणी होर मन बदले अगर तूह जागरीत नांई होलअ तेबा महा चोरा साही ईहंणा होर ताह कधी नांई जाडणा की हाऊं कासु वक्ते ताह सेटा बे ईहणा। See the chapter |