शधाणूं 8:4 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान4 ज़ुंण विश्वासी ओर्ही-पोर्ही छिंघुऐ, तिंयां नाठै हर ज़ैगा खुशीए समादा खोज़दी। See the chapterकुल्वी4 ज़ो बिश्वासी लोका तितर-बितर हुऐ ती, ते लोका बै खुशी रा समाद दैसदै रौहै। See the chapterईनर सराजी मे नया नियम4 पर जोह तितर बितर होई थी त्याह सुसमाचार शुणाऊंदे लागे । See the chapter |