27 ते ऊं इन्सान जाया शरीरिक रूपा कनु बिना खतने चे रेहले, अगर ऊं व्यवस्था नु पुरी करे, तां का तनु जको लिखली आली व्यवस्था मिड़ली ते खतना करले जाणे उपर वी व्यवस्था नु ना मनी, का दोषी नी ठहरावी?