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प्रकाशितवाक्य 3:3 - ओङ राजपूत

3 ऐवास्ते चैते कर कि तु किसड़ी शिक्षा गेहली ते सुणली हुती, ते विचे मां बणला रेह ते आपणे मन फिरा। अगर तु सुज़ाक नी रिहे तां मैं चोरा आलीकर आती जई, ते तु हरगिज नी जाण सग़े कि मैं केस घड़ी दुधे उपर आती पड़ी।

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प्रकाशितवाक्य 3:3

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