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5.0★★★★★
4 हर एक अपनो ही स्वार्थ की नी, यानी दूसरा का स्वार्थ कि भी चिन्ता कर।
4 हरकोनी आपलो ची हित ची नाई, मान्तर दुसरमन चो हित चो बले चिन्ता करा।