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5.0★★★★★
14 उन्की आंखी म व्यभिचार बस्यो हुयो हय, अऊर हि पाप करयो बिना रुक नहीं सकय। हि कमजोर लोगों ख जार म फसाय लेवय हंय। उन्को मन ख लोभ करन को अभ्यास होय गयो हय; हि परमेश्वर को श्राप म हंय।