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मतीके लिखल सुसमाचार 5:28 - मध्‍य पुरविया थारू

28 महज हम तोरासबके कहैचियौ, जे कोइ कोनो जनीके गलत नजरसे देखैछै, त उ पैहनैये आपन मनमे ओकरसे बेबिचार कैरलेने रहैछै।

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मतीके लिखल सुसमाचार 5:28

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