37 दंङ धर्मीज़ि दोबि जुबाब रमोर “हे प्रभु, ञेंहच़ी कांह अपेहल योंए तंङातेंई दंङ खिलाकातेंई? या तीस्कार शुहबे ती पिलाकातेंई?