33 अपेहल मुंजे शुहबिमी तोहई, दंङ पोलुसे दि कुचे, भत्ते तिंङ बगत ज़ेइमी विनती लहरी, “तोग सपि ध्याड़ा शुहचे इलि दंङ केरे चिंद लहज़ा-लहज़ा योंई बङज़िनि, दंङ छल्ले बगत माह ज़हरिर।”