32 अग्रिप्पा ज़ि फेस्तुस रंङ साते कुई, “अगर दि मीहज़ी दि मांग लहसी माह शुचंङ कि महाराजा ज़ि दोऊ फेंसला लोहतो, दंङ दि रिहा शुहबी तरच़ाते।”