मुकाशफ़ा 9:2 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 और जब उसने अथाह गड्ढे को खोला तो गड्ढे में से एक बड़ी भट्टी का सा धुवाँ उठा, और गड्ढे के धुवें के ज़रिए से सूरज और हवा तारीक हो गई। See the chapterउर्दू हमअस्र तरजुमा2 जब उस ने अथाह गढ़े को खोला तो उस में से एक बड़ी भट्टी का सा धुआं उठा। उस धोईं के बाइस सूरज और सारी फ़िज़ा तारीक हो गई। See the chapterकिताब-ए मुक़द्दस2 उसने अथाह गढ़े का रास्ता खोल दिया तो उससे धुआँ निकलकर ऊपर आया, यों जैसे धुआँ किसी बड़े भट्टे से निकलता है। सूरज और चाँद अथाह गढ़े के इस धुएँ से तारीक हो गए। See the chapter |