मुकाशफ़ा 7:2 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 फिर मैंने एक और फ़रिश्ते को, ज़िन्दा ख़ुदा की मुहर लिए हुए मशरिक़ से ऊपर की तरफ़ आते देखा; उसने उन चारों फ़रिश्तों से, जिन्हें ज़मीन और समुन्दर को तकलीफ़ पहुँचाने का इख़्तियार दिया गया था, ऊँची आवाज़ से पुकार कर कहा, See the chapterउर्दू हमअस्र तरजुमा2 फिर मैंने एक और फ़रिश्ते को ज़िन्दा ख़ुदा की मुहर लिये हुए मशरिक़ से ऊपर की तरफ़ आते देखा। उस ने उन चारों फ़रिश्तों से जिन्हें ज़मीन और समुन्दर को नुक़्सान पहुंचाने का इख़्तियार दिया गया था बुलन्द आवाज़ से पुकार कर कहा, See the chapterकिताब-ए मुक़द्दस2 फिर मैंने एक और फ़रिश्ता मशरिक़ से चढ़ते हुए देखा जिसके पास ज़िंदा ख़ुदा की मुहर थी। उसने ऊँची आवाज़ से उन चार फ़रिश्तों से बात की जिन्हें ज़मीन और समुंदर को नुक़सान पहुँचाने का इख़्तियार दिया गया था। उसने कहा, See the chapter |