4 इंसान के मुँह की बातें गहरे पानी की तरह है और हिकमत का चश्मा बहता नाला है।
4 इनसान के अलफ़ाज़ गहरा पानी हैं, हिकमत का सरचश्मा बहती हुई नदी है।