मीकाह 7:1 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20191 मुझ पर अफ़सोस! मैं ताबिस्तानी मेवा जमा' होने और अंगूर तोड़ने के बाद की ख़ोशाचीनी की तरह हूँ, न खाने को कोई ख़ोशा, और न पहला पक्का दिलपसंद अंजीर है। See the chapterकिताब-ए मुक़द्दस1 हाय, मुझ पर अफ़सोस! मैं उस शख़्स की मानिंद हूँ जो फ़सल के जमा होने पर अंगूर के बाग़ में से गुज़र जाता है ताकि बचा हुआ थोड़ा-बहुत फल मिल जाए, लेकिन एक गुच्छा तक बाक़ी नहीं। मैं उस आदमी की मानिंद हूँ जो अंजीर का पहला फल मिलने की उम्मीद रखता है लेकिन एक भी नहीं मिलता। See the chapter |