1 धिक्कार ए ओ खून के सहर ला, जऊन ह लबारी बात ले भरे हवय, जऊन ह लूट-पाट ले भरे हवय, अऊ जऊन ह दुखित-पीड़ित मनखेमन ले कभू नइं छूटय!