रोमियों 6:2 - किताब-ए मुक़द्दस2 हरगिज़ नहीं! हम तो मरकर गुनाह से लाताल्लुक़ हो गए हैं। तो फिर हम किस तरह गुनाह को अपने आप पर हुकूमत करने दे सकते हैं? See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 हरगिज़ नहीं हम जो गुनाह के ऐ'तिबार से मर गए क्यूँकर उस में फिर से ज़िन्दगी गुज़ारें? See the chapterउर्दू हमअस्र तरजुमा2 हरगिज़ नहीं! हम जो गुनाह के एतबार से मर चुके हैं तो फिर क्यूं कर गुनाह आलूदा ज़िन्दगी गुज़ारते हैं? See the chapter |