रोमियों 3:7 - किताब-ए मुक़द्दस7 शायद कोई और एतराज़ करे, “अगर मेरा झूट अल्लाह की सच्चाई को कसरत से नुमायाँ करता है और यों उसका जलाल बढ़ता है तो वह मुझे क्योंकर गुनाहगार क़रार दे सकता है?” See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20197 अगर मेरे झूठ की वजह से ख़ुदा की सच्चाई उसके जलाल के वास्ते ज़्यादा ज़ाहिर हुई तो फिर क्यूँ गुनाहगार की तरह मुझ पर हुक्म दिया जाता है? See the chapterउर्दू हमअस्र तरजुमा7 शायद कोई कहे, “अगर मेरे झूट के सबब से ख़ुदा की सच्चाई ज़्यादा सफ़ाई से नज़्र आती है और ख़ुदा का जलाल ज़ाहिर होता है तो फिर मैं क्यूं गुनहगार शुमार किया जाता हूं?” See the chapter |