रोमियों 2:1 - किताब-ए मुक़द्दस1 ऐ इनसान, क्या तू दूसरों को मुजरिम ठहराता है? तू जो कोई भी हो तेरा कोई उज़्र नहीं। क्योंकि तू ख़ुद भी वही कुछ करता है जिसमें तू दूसरों को मुजरिम ठहराता है और यों अपने आपको भी मुजरिम क़रार देता है। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20191 पस ऐ इल्ज़ाम लगाने वाले तू कोई क्यूँ न हो तेरे पास कोई बहाना नहीं क्यूँकि जिस बात से तू दूसरे पर इल्ज़ाम लगाता है उसी का तू अपने आप को मुजरिम ठहराता है इसलिए कि तू जो इल्ज़ाम लगाता है ख़ुद वही काम करता है। See the chapterउर्दू हमअस्र तरजुमा1 चुनांचे, ऐ इल्ज़ाम लगाने वालो, तुम्हारे पास कोई उज़्र नहीं, क्यूंके तुम जिस बात का इल्ज़ाम दूसरे पर लगाते हो, और ख़ुद पर सज़ा का हुक्म नाफ़िज़ कर रहो है, तुम अपने आप को मुजरिम ठहराते हो। See the chapter |