ज़बूर 142:4 - किताब-ए मुक़द्दस4 मैं दहनी तरफ़ नज़र डालकर देखता हूँ, लेकिन कोई नहीं है जो मेरा ख़याल करे। मैं बच नहीं सकता, कोई नहीं है जो मेरी जान की फ़िकर करे। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20194 दहनी तरफ़ निगाह कर और देख, मुझे कोई नहीं पहचानता। मेरे लिए कहीं पनाह न रही, किसी को मेरी जान की फ़िक्र नहीं। See the chapter |