ज़बूर 142:3 - किताब-ए मुक़द्दस3 जब मेरी रूह मेरे अंदर निढाल हो जाती है तो तू ही मेरी राह जानता है। जिस रास्ते में मैं चलता हूँ उसमें लोगों ने फंदा छुपाया है। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20193 जब मुझ में मेरी जान निढाल थी, तू मेरी राह से वाक़िफ़ था! जिस राह पर मैं चलता हूँ उसमे उन्होंने मेरे लिए फंदा लगाया है। See the chapter |