ज़बूर 141:2 - किताब-ए मुक़द्दस2 मेरी दुआ तेरे हुज़ूर बख़ूर की क़ुरबानी की तरह क़बूल हो, मेरे तेरी तरफ़ उठाए हुए हाथ शाम की ग़ल्ला की नज़र की तरह मंज़ूर हों। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 मेरी दुआ तेरे सामने ख़ुशबू की तरह हो, और मेरा हाथ उठाना शाम की कु़र्बानी की तरह! See the chapter |