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ज़बूर 14:3 - किताब-ए मुक़द्दस

3 अफ़सोस, सब सहीह राह से भटक गए, सबके सब बिगड़ गए हैं। कोई नहीं जो भलाई करता हो, एक भी नहीं।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

3 वह सब के सब गुमराह हुए, वह एक साथ नापाक हो गए, कोई नेकोकार नहीं, एक भी नहीं।

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ज़बूर 14:3

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