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अम्सा 4:18 - किताब-ए मुक़द्दस

18 लेकिन रास्तबाज़ की राह तुलूए-सुबह की पहली रौशनी की मानिंद है जो दिन के उरूज तक बढ़ती रहती है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

18 लेकिन सादिक़ों की राह सुबह की रोशनी की तरह है, जिसकी रोशनी दो पहर तक बढ़ती ही जाती है।

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अम्सा 4:18

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