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अम्सा 27:4 - किताब-ए मुक़द्दस

4 ग़ुस्सा ज़ालिम होता और तैश सैलाब की तरह इनसान पर आ जाता है, लेकिन कौन हसद का मुक़ाबला कर सकता है?

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

4 ग़ुस्सा सख़्त बेरहमी और क़हर सैलाब है, लेकिन जलन के सामने कौन खड़ा रह सकता है?

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अम्सा 27:4

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