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मलाकी 2:5 - किताब-ए मुक़द्दस

5 क्योंकि मैंने अहद बाँधकर लावियों से ज़िंदगी और सलामती का वादा किया था, और मैंने वादे को पूरा भी किया। उस वक़्त लावी मेरा ख़ौफ़ मानते बल्कि मेरे नाम से दहशत खाते थे।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

5 उसके साथ मेरा 'अहद ज़िन्दगी और सलामती का था, और मैंने ज़िन्दगी और सलामती इसलिए बख़्शी कि वह डरता रहे; चुनाँचे वह मुझ से डरा और मेरे नाम से तरसान रहा।

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मलाकी 2:5

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