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लूक़ा 16:3 - किताब-ए मुक़द्दस

3 मुलाज़िम ने दिल में कहा, ‘अब मैं क्या करूँ जबकि मेरा मालिक यह ज़िम्मादारी मुझसे छीन लेगा? खुदाई जैसा सख़्त काम मुझसे नहीं होता और भीक माँगने से शर्म आती है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

3 उस मुख़्तार ने अपने जी में कहा, 'क्या करूँ? क्यूँकि मेरा मालिक मुझ से ज़िम्मेदारी छीन लेता है। मिट्टी तो मुझ से खोदी नहीं जाती और भीख माँगने से शर्म आती है।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

3 “मुंशी ने दिल में सोचा, ‘अब मैं क्या करूं? मेरा मालिक मुझे काम से निकाल रहा है। मुझ में मिट्टी खोदने की ताक़त तो नहीं है। और शरम के मारे भीक भी नहीं मांग सकता।

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लूक़ा 16:3

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