अहबार 5:5 - किताब-ए मुक़द्दस5 जो इस तरह के किसी गुनाह की बिना पर क़ुसूरवार हो, लाज़िम है कि वह अपना गुनाह तसलीम करे। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20195 और जब वह इन बातों में से किसी में मुजरिम हो, तो जिस अम्र में उससे ख़ता हुई है वह उसका इक़रार करे, See the chapter |