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अहबार 22:21 - किताब-ए मुक़द्दस

21 अगर कोई रब को सलामती की क़ुरबानी पेश करना चाहे तो तरीक़े-कार में कोई फ़रक़ नहीं है, चाहे वह यह मन्नत मानकर या वैसे ही दिली ख़ुशी से कर रहा हो। इसके लिए लाज़िम है कि वह गाय-बैलों या भेड़-बकरियों में से बेऐब जानवर चुने। फिर उसे क़बूल किया जाएगा।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

21 और जो कोई अपनी मिन्नत पूरी करने के लिए या रज़ा की क़ुर्बानी के तौर पर गाय, बैल या भेड़ बकरी में से सलामती का ज़बीहा ख़ुदावन्द के सामने पेश करे, तो वह जानवर मक़बूल ठहरने के लिए बे — 'ऐब हो; उसमें कोई नुक़्स न हो।

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अहबार 22:21

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