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अहबार 14:31 - किताब-ए मुक़द्दस

31 एक को गुनाह की क़ुरबानी के लिए और दूसरे को भस्म होनेवाली क़ुरबानी के लिए। साथ ही वह ग़ल्ला की नज़र पेश करे। यों इमाम रब के सामने उसका कफ़्फ़ारा देता है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

31 या'नी जो कुछ उसे मयस्सर हुआ हो उस में से एक को ख़ता की क़ुर्बानी के तौर पर और दूसरे को सोख़्तनी क़ुर्बानी के तौर पर, नज़्र की क़ुर्बानी के साथ पेश करे। यूँ काहिन उस शख़्स के लिए जो पाक क़रार दिया जाएगा, ख़ुदावन्द के सामने कफ़्फ़ारा दे।

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अहबार 14:31

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