नोहा 4:17 - किताब-ए मुक़द्दस17 हम चारों तरफ़ आँख दौड़ाते रहे, लेकिन बेफ़ायदा, कोई मदद न मिली। देखते देखते हमारी नज़र धुँधला गई। क्योंकि हम अपने बुर्जों पर खड़े एक ऐसी क़ौम के इंतज़ार में रहे जो हमारी मदद कर ही नहीं सकती थी। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201917 हमारी आँखें बातिल मदद के इन्तिज़ार में थक गईं, हम उस क़ौम का इन्तिज़ार करते रहे जो बचा नहीं सकती थी। See the chapter |