नोहा 3:32 - किताब-ए मुक़द्दस32 उस की शफ़क़त इतनी अज़ीम है कि गो वह कभी इनसान को दुख पहुँचाए तो भी वह आख़िरकार उस पर दुबारा रहम करता है। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201932 क्यूँकि अगरचे वह दुख़ दे, तोभी अपनी शफ़क़त की दरयादिली से रहम करेगा। See the chapter |