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इबरानियों 7:28 - किताब-ए मुक़द्दस

28 मूसवी शरीअत ऐसे लोगों को इमामे-आज़म मुक़र्रर करती है जो कमज़ोर हैं। लेकिन शरीअत के बाद अल्लाह की क़सम फ़रज़ंद को इमामे-आज़म मुक़र्रर करती है, और यह फ़रज़ंद अबद तक कामिल है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

28 मूसा की शरी'अत ऐसे लोगों को इमाम — ए — आज़म मुक़र्रर करती है जो कमज़ोर हैं। लेकिन शरी'अत के बाद ख़ुदा की क़सम फ़र्ज़न्द को इमाम — ए — आज़म मुक़र्रर करती है, और यह ख़ुदा का फ़र्ज़न्द हमेशा तक कामिल है।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

28 मूसवी शरीअत तो ग़ैर कामिल आदमियों को आला काहिन मुक़र्रर करती है मगर शरीअत के बाद ख़ुदा ने क़सम खाकर अपने कलाम से अपने बेटे को मुक़र्रर किया जो अबद तक कामिल किया जा चुका है।

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इबरानियों 7:28

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