वाइज़ 8:8 - किताब-ए मुक़द्दस8 कोई भी इनसान हवा को बंद रखने के क़ाबिल नहीं। इसी तरह किसी को भी अपनी मौत का दिन मुक़र्रर करने का इख़्तियार नहीं। यह उतना यक़ीनी है जितना यह कि फ़ौजियों को जंग के दौरान फ़ारिग़ नहीं किया जाता और बेदीनी बेदीन को नहीं बचाती। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20198 किसी आदमी को रूह पर इख़्तियार नहीं कि उसे रोक सके, और मरने का दिन भी उसके इख़्तियार से बाहर है; और उस लड़ाई से छुट्टी नहीं मिलतीऔर न शरारत उसको जो उसमे ग़र्क़ हैं छुड़ाएगी See the chapter |