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वाइज़ 6:9 - किताब-ए मुक़द्दस

9 दूर-दराज़ चीज़ों के आरज़ूमंद रहने की निसबत बेहतर यह है कि इनसान उन चीज़ों से लुत्फ़ उठाए जो आँखों के सामने ही हैं। यह भी बातिल और हवा को पकड़ने के बराबर है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

9 आँखों से देख लेना आरज़ू की आवारगी से बेहतर है: ये भी बेकार और हवा की चरान है।

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वाइज़ 6:9

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