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वाइज़ 6:5 - किताब-ए मुक़द्दस

5 लेकिन गो उसने न कभी सूरज देखा, न उसे कभी मालूम हुआ कि ऐसी चीज़ है ताहम उसे मज़कूरा आदमी से कहीं ज़्यादा आरामो-सुकून हासिल है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

5 उसने सूरज को भी न देखा, न किसी चीज़ को जाना, फिर वह उस दूसरे से ज़्यादा आराम में है।

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वाइज़ 6:5

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