वाइज़ 5:10 - किताब-ए मुक़द्दस10 जिसे पैसे प्यारे हों वह कभी मुतमइन नहीं होगा, ख़ाह उसके पास कितने ही पैसे क्यों न हों। जो ज़रदोस्त हो वह कभी आसूदा नहीं होगा, ख़ाह उसके पास कितनी ही दौलत क्यों न हो। यह भी बातिल ही है। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201910 ज़रदोस्त रुपये से आसूदा न होगा, और दौलत का चाहनेवाला उसके बढ़ने से सेर न होगा:ये भी बेकार है। See the chapter |