वाइज़ 11:4 - किताब-ए मुक़द्दस4 जो हर वक़्त हवा का रुख़ देखता रहे वह कभी बीज नहीं बोएगा। जो बादलों को तकता रहे वह कभी फ़सल की कटाई नहीं करेगा। See the chapterइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20194 जो हवा का रुख़ देखता रहता है वह बोता नहीं और जो बा'दलों को देखता है वह काटता नहीं। See the chapter |