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वाइज़ 1:4 - किताब-ए मुक़द्दस

4 एक पुश्त आती और दूसरी जाती है, लेकिन ज़मीन हमेशा तक क़ायम रहती है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

4 एक नसल जाती है और दूसरी नसल आती है, लेकिन ज़मीन हमेशा क़ायम रहती है।

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वाइज़ 1:4

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